अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ को लेकर की गई नई घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में अस्थिरता का माहौल बन गया है। उनके इस फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और निवेश के वातावरण पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ यह आर्थिक कदम बाजार में उतार-चढ़ाव को और बढ़ा सकता है।

टैरिफ से जुड़े इस ऐलान के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई है, जिससे शेयर बाजारों में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। खासतौर पर आयात-निर्यात पर निर्भर उद्योगों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है। व्यापारिक गतिविधियों में मंदी आने और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ने का खतरा भी जताया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका द्वारा टैरिफ में संभावित बदलाव से वैश्विक व्यापार संबंधों में खटास आ सकती है, जिसका असर कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। ईरान के साथ जारी राजनीतिक तनाव के चलते पहले से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार संवेदनशील स्थिति में हैं, ऐसे में यह घोषणा निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों, मुद्रा विनिमय दरों और वैश्विक निवेश प्रवाह पर भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है, जिससे निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस परिस्थिति में दीर्घकालिक निवेश रणनीतियों पर ध्यान देना और जोखिम प्रबंधन के उपाय अपनाना आवश्यक होगा। वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों के बीच यह निर्णय बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
