राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देवघर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के प्रबुद्धजनों के साथ विचार-मंथन किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि समाज में पांच बड़े परिवर्तन लाकर ही एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है।

सामाजिक समरसता सबसे बड़ा आधार

कार्यक्रम में वक्ताओं ने जोर देते हुए कहा कि समाज में एकता और समरसता मजबूत राष्ट्र की नींव होती है।

उन्होंने कहा कि जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को एकजुट करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
पांच बदलावों पर जोर
वक्ताओं के अनुसार, राष्ट्र निर्माण के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों में परिवर्तन जरूरी है—
सामाजिक समरसता को बढ़ावा
परिवार और संस्कारों को मजबूत करना
नागरिक कर्तव्यों के प्रति जागरूकता
स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा
शिक्षा और नैतिक मूल्यों का विकास
इन बिंदुओं पर काम करके ही देश को मजबूत बनाया जा सकता है।
आध्यात्मिकता और सहभागिता पर बल
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि आध्यात्मिक जागरूकता और समाज की व्यापक भागीदारी से ही सकारात्मक बदलाव संभव है।
वक्ताओं ने युवाओं से अपील की कि वे राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें।
शिक्षा और संवाद की भूमिका
इस आयोजन में शिक्षा और संवाद को भी अहम बताया गया। कहा गया कि सही जानकारी और खुले विचारों के आदान-प्रदान से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।
निष्कर्ष
देवघर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक विचार गोष्ठी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए दिशा तय करने वाला मंच साबित हुआ।