गाजा में जारी संघर्ष के बीच इजराइल पर प्रतिबंधित माने जाने वाले ‘वैक्यूम बम’ (थर्मोबैरिक हथियार) इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप लगे हैं। रिपोर्ट ‘द रेस्ट ऑफ द स्टोरी’ के अनुसार, ये बम पहले हवा में ईंधन जैसा ज्वलनशील बादल फैलाते हैं और फिर उसमें विस्फोट कर आग लगा दी जाती है। इससे एक विशाल आग का गोला बनता है और आसपास की ऑक्सीजन तेजी से खिंच जाती है, जिससे क्षणिक ‘वैक्यूम’ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे धमाकों से तापमान 3,500 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इन बमों में एल्यूमिनियम और मैग्नीशियम जैसे धात्विक तत्वों का मिश्रण होता है, जो विस्फोट के दौरान अत्यधिक गर्मी और दबाव पैदा करते हैं। मिलिट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि थर्मोबैरिक हथियार बंद जगहों, इमारतों और सुरंगों में खासतौर पर ज्यादा घातक साबित होते हैं, क्योंकि वे ऑक्सीजन को जलाकर अंदर मौजूद लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।

चश्मदीदों और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, हमलों के बाद कई इलाकों में ऐसे दृश्य सामने आए जहां शवों के अवशेष तक नहीं मिले। गाजा की सिविल डिफेंस टीम ने 2,842 ऐसे फिलिस्तीनियों का रिकॉर्ड दर्ज किया है, जिनके बारे में बताया गया कि दफनाने के लिए उनके शरीर का कोई हिस्सा तक शेष नहीं था। इसके अलावा 3,500 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

हालांकि, इजराइल की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया स्पष्ट नहीं हो सकी है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने घटना की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि थर्मोबैरिक हथियारों के इस्तेमाल को लेकर वैश्विक स्तर पर स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है, लेकिन घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इनके प्रयोग को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन माना जा सकता है।

गौरतलब है कि गाजा में जारी संघर्ष ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है। अस्पतालों, राहत शिविरों और रिहायशी इलाकों पर हमलों से नागरिक हताहतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या इन आरोपों की पारदर्शी जांच होगी और जिम्मेदार पक्षों पर कोई कार्रवाई की जाएगी या नहीं।
