झारखंड में नगर निकाय चुनाव लोकतंत्र के महापर्व की तरह मनाए गए। राज्य के 48 नगर निकायों में मतदान शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ और औसतन करीब 62 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। सुबह होते ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों में मतदान को लेकर खासा उत्साह नजर आया।

राज्यभर में मेयर, अध्यक्ष और पार्षद पदों के लिए कुल सैकड़ों प्रत्याशी मैदान में थे। चुनाव को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की थीं। संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए भी निगरानी रखी गई।

हालांकि, कुछ स्थानों पर छिटपुट हिंसा की खबरें भी सामने आईं। गिरिडीह में चुनावी विवाद के दौरान गोलीबारी की घटना में दो लोग घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना के बाद इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया और स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया।

इसके अलावा कुछ अन्य क्षेत्रों में कहासुनी और हल्की झड़प की घटनाएं भी सामने आईं, लेकिन प्रशासन का कहना है कि अधिकांश स्थानों पर मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। जहां-जहां ईवीएम में तकनीकी दिक्कतें आईं, वहां चुनाव आयोग के कर्मचारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मशीनों को ठीक कर मतदान प्रक्रिया को जारी रखा।

इस बार महिला मतदाताओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। कई बूथों पर महिलाओं की कतारें पुरुषों से लंबी नजर आईं। पहली बार वोट डालने वाले युवाओं में भी खास उत्साह देखने को मिला।

चुनाव आयोग के अनुसार, मतदान प्रतिशत संतोषजनक रहा और इसे लोकतंत्र के प्रति जनता की जागरूकता का संकेत माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं। मतगणना के बाद यह साफ होगा कि नगर निकायों की कमान किसके हाथ में जाएगी और शहरों के विकास की दिशा कौन तय करेगा।

कुल मिलाकर, झारखंड में निकाय चुनाव लोकतांत्रिक परंपरा के उत्सव के रूप में संपन्न हुए, जहां जनता ने अपने अधिकार का प्रयोग कर लोकतंत्र को मजबूत करने का संदेश दिया।