हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को Sankashti Chaturthi मनाई जाती है। इस महीने पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखकर भगवान Ganesha की पूजा करते हैं और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करते हैं।

📅 भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी कब है?

दृक पंचांग के अनुसार चैत्र कृष्ण चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 मार्च 2026 को शाम 5:53 बजे से होगी और इसका समापन 7 मार्च 2026 को शाम 7:17 बजे पर होगा।

संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्र दर्शन के समय चतुर्थी तिथि होना जरूरी माना जाता है। इस बार 6 मार्च की रात को चंद्र उदय के समय चतुर्थी तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए यह व्रत 6 मार्च 2026 को रखा जाएगा।
⏰ चंद्रोदय का समय
संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत खोला जाता है।
चंद्रोदय का समय: रात 9:14 बजे
कुछ पंचांगों के अनुसार चांद लगभग 9:31 बजे दिखाई दे सकता है।
⚠️ चतुर्थी पर भद्रा का प्रभाव
इस दिन भद्रा काल सुबह 6:41 बजे से शाम 5:53 बजे तक रहेगा। हालांकि भद्रा का वास पाताल लोक में होने के कारण पूजा-पाठ में इसे अशुभ नहीं माना गया है।
🙏 व्रत और पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
पूजा स्थान पर लाल वस्त्र बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
गणेश जी को हल्दी, रोली और अक्षत से तिलक करें और दीपक जलाएं।
“ॐ भालचंद्राय नमः” मंत्र का जाप करें और संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा पढ़ें।
गणेश जी को दूर्वा, मोदक और लड्डू का भोग लगाएं और आरती करें।
शाम को चंद्रोदय के बाद चंद्र देव को अर्घ्य दें और फिर प्रसाद ग्रहण कर व्रत का पारण करें।