पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को भेजा गया शांति प्रस्ताव ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने 15-सूत्रीय प्रस्ताव के जरिए क्षेत्र में जारी संघर्ष को समाप्त करने की कोशिश की, लेकिन ईरान ने इसे “अव्यवहारिक” बताते हुए अस्वीकार कर दिया।

ईरान की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि जब तक उनकी शर्तों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक किसी भी तरह की शांति वार्ता संभव नहीं है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए पांच प्रमुख शर्तें रखी हैं, जिनमें आक्रमण की जिम्मेदारी तय करना, नुकसान की भरपाई और क्षेत्रीय अधिकारों को मान्यता देना शामिल है।

इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ “युद्ध जीत लिया है” और उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। वहीं, ईरान के सैन्य प्रवक्ता ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ट्रंप “भ्रम फैला रहे हैं” और जमीनी हकीकत कुछ और है।

इसी कड़ी में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को भी झटका लगा है। जानकारी के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान के एक जहाज को रोकते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि वह किसी भी बाहरी दबाव में नहीं आने वाला। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ दोनों देशों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो पाया।
भारत में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को “दलाल राष्ट्र” बताते हुए कहा कि अमेरिका 1981 से उसका इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित करना है।