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सीक्रेट मीटिंग में बड़ा फैसला? नेतन्याहू ने ट्रम्प को ईरान पर हमले के लिए मनाया, वेंस थे खिलाफ

International April 8, 2026 By Mrityunejay Malviya
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अमेरिका और इज़राइल के बीच एक बेहद गोपनीय बैठक ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ एक सीक्रेट मीटिंग की, जिसमें ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर चर्चा हुई।

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सूत्रों के अनुसार, यह बैठक इतनी गोपनीय थी कि नेतन्याहू को बिना किसी औपचारिक स्वागत के सीधे अंदर ले जाया गया। पहले कैबिनेट रूम में बातचीत हुई और फिर उन्हें व्हाइट हाउस के सबसे संवेदनशील हिस्से — सिचुएशन रूम — में ले जाया गया, जहां आमतौर पर युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले लिए जाते हैं।

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बैठक के दौरान ट्रम्प ने पारंपरिक तरीके से टेबल के ‘हेड’ पर बैठने के बजाय साइड में बैठकर स्क्रीन पर ध्यान केंद्रित किया। इस स्क्रीन पर इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख और सैन्य अधिकारी लाइव जुड़े हुए थे, जिससे यह संकेत मिला कि चर्चा बेहद गंभीर और रणनीतिक थी।

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इस हाई-लेवल मीटिंग में कुछ चुनिंदा लोग ही मौजूद थे, जिनमें विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सीआईए प्रमुख जॉन रैटक्लिफ, और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बैठक में मौजूद नहीं थे और रिपोर्ट्स के अनुसार वे इस संभावित हमले के पक्ष में नहीं हैं।

नेतन्याहू का बड़ा दावा

नेतन्याहू ने करीब एक घंटे का प्रेजेंटेशन देकर ट्रम्प को समझाया कि यह ईरान पर हमला करने का “सबसे सही समय” है। उनका कहना था कि:

ईरान की सरकार इस समय कमजोर है

संयुक्त हमला उसकी सैन्य ताकत को जल्दी खत्म कर सकता है

मिसाइल सिस्टम कुछ हफ्तों में तबाह किया जा सकता है

आंतरिक विरोध प्रदर्शन सरकार को गिरा सकते हैं

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इराक के कुर्द लड़ाके ईरान में घुसकर एक नया मोर्चा खोल सकते हैं, जिससे स्थिति और कमजोर हो सकती है।

सत्ता परिवर्तन की भी चर्चा

मीटिंग में एक वीडियो भी दिखाया गया जिसमें संभावित नए नेताओं का जिक्र था, जिनमें रजा पहलवी का नाम भी सामने आया — जो ईरान के आखिरी शाह के बेटे हैं।

नेतन्याहू ने साफ कहा कि “अभी हमला करना जरूरी है”, क्योंकि देरी होने पर ईरान और मजबूत हो सकता है। उनके मुताबिक, “कुछ न करने का खतरा, हमला करने के खतरे से ज्यादा है।”

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