दिल की बीमारियां अब सिर्फ बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रहीं। पिछले कुछ वर्षों में युवाओं और किशोरों में भी हार्ट अटैक के मामले बढ़े हैं। ऐसे में एक सवाल अक्सर उठता है—क्या 10 साल से कम उम्र के बच्चों को भी हार्ट अटैक हो सकता है?

🔎 क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बाल हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार, टॉडलर (1–3 साल) और प्री-स्कूल (3–5 साल) उम्र के बच्चों में हार्ट अटैक बेहद दुर्लभ होता है। आमतौर पर लाइफस्टाइल से जुड़े कारण इस आयु वर्ग में दिल के दौरे की वजह नहीं बनते।

हालांकि, कुछ विशेष स्थितियों में जोखिम हो सकता है, जैसे:

जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease)

आनुवांशिक हृदय संबंधी विकार

कावासाकी रोग (Kawasaki Disease)
हृदय की संरचनात्मक खराबियां
इन स्थितियों में दिल तक खून का संचार प्रभावित हो सकता है, जिससे गंभीर जटिलताएं उत्पन्न होने की आशंका रहती है।
📈 युवाओं में क्यों बढ़ रहे हैं मामले?
विशेषज्ञों के अनुसार 20 साल से कम उम्र के युवाओं में हृदय रोग के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं:
प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा नमक, ट्रांस फैट और चीनी
मोटापा
हाई ब्लड प्रेशर
इंसुलिन रेजिस्टेंस
व्यायाम की कमी
लगातार तनाव (कॉर्टिसोल हार्मोन में वृद्धि)
हालांकि ये कारक छोटे बच्चों में हार्ट अटैक के प्रमुख कारण नहीं होते, लेकिन किशोरावस्था में खतरा बढ़ सकता है।
🚨 बच्चों में किन लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें?
अगर बच्चे में नीचे दिए लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
सीने में दर्द, खासकर दौड़ने या खेलने के दौरान
अचानक चक्कर आना या बेहोशी
सांस लेने में तकलीफ
दिल की धड़कन का तेज या अनियमित होना
त्वचा का रंग नीला या पीला पड़ना (सायनोसिस)
अत्यधिक थकान या चिड़चिड़ापन
ये संकेत किसी गंभीर हृदय समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं।
🩺 निष्कर्ष
10 साल से कम उम्र के बच्चों में हार्ट अटैक बेहद दुर्लभ है, लेकिन जन्मजात या दुर्लभ हृदय रोग वाले बच्चों में जोखिम हो सकता है। माता-पिता को घबराने के बजाय सतर्क रहना चाहिए और किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।