दिल्ली की सियासत में एक बार फिर टकराव तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष Vijender Gupta ने मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal पर निशाना साधते हुए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पिछले पांच महीने से जेल में हैं और त्यागपत्र देने के बजाय जेल से सरकार चलाने की घोषणा की है। ऐसे में जनता को यह बताया जाए कि इस दौरान मुख्यमंत्री ने कितने फैसले लिए, कितनी कैबिनेट बैठकें हुईं और उनमें क्या निर्णय लिए गए।

🏛 “पांच महीने से न कैबिनेट बैठक, न सत्र”

भाजपा विधायकों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है और मांग की है कि उसमें उठाए गए मुद्दों पर Delhi Legislative Assembly में चर्चा हो।
विजेंद्र गुप्ता का आरोप है कि पिछले पांच महीनों में न तो कैबिनेट की नियमित बैठक हुई और न ही विधानसभा का सत्र बुलाया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की अनदेखी बताया और तत्काल विशेष सत्र बुलाने की मांग दोहराई।
💰 नगर निगम और वित्तीय स्थिति पर सवाल
विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि:
मुख्यमंत्री राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष हैं, फिर भी उसकी बैठक नहीं हुई।
छठे दिल्ली वित्त आयोग का गठन नहीं किया गया।
नगर निगम की वित्तीय स्थिति लगातार खराब हो रही है।
पिछले सात वर्षों की कैग की 11 रिपोर्टों पर कार्रवाई स्पष्ट नहीं है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 15 मार्च 2024 को मुख्य सचिव द्वारा जल मंत्री को सौंपी गई जल बोर्ड की वित्तीय अनियमितता रिपोर्ट सदन में पेश नहीं की गई।
साथ ही दावा किया कि जल बोर्ड ने दिल्ली सरकार को 73 हजार करोड़ रुपये का लोन लौटाने से इनकार कर दिया है।
🏥 योजनाओं और विश्वविद्यालयों पर श्वेत पत्र की मांग
भाजपा ने निम्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा है:
आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू न करने का कारण
राज्य से वित्तपोषित 12 कॉलेजों को फंड न देना
दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विकास विश्वविद्यालय, शिक्षक विश्वविद्यालय और खेल विश्वविद्यालय पर श्वेत पत्र जारी करना
सात ICU अस्पताल व पाली क्लीनिक प्रोजेक्ट में देरी और लागत बढ़ने का कारण
“जहां झुग्गी वहीं मकान” योजना और झुग्गियों में नल से जल की स्थिति
राजनीतिक संदेश क्या?
भाजपा का फोकस सरकार की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाने पर है। वहीं आम आदमी पार्टी की ओर से अब तक इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
दिल्ली की सियासत में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने के संकेत हैं, खासकर अगर विशेष सत्र बुलाने की मांग पर निर्णय लिया जाता है।