डिटॉक्स ड्रिंक्स—जैसे नींबू-शहद पानी, एप्पल साइडर विनेगर, हर्बल काढ़े या “क्लेंज़ जूस”—इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब ट्रेंड कर रहे हैं। दावा किया जाता है कि ये शरीर से “टॉक्सिन” निकालते हैं, वजन घटाते हैं और लिवर-किडनी को साफ करते हैं। लेकिन क्या वाकई ऐसा है?

🧪 क्या शरीर को बाहरी “डिटॉक्स” की जरूरत है?

डॉक्टर बताते हैं कि हमारे शरीर में पहले से ही प्राकृतिक डिटॉक्स सिस्टम मौजूद है—

लिवर (विषैले पदार्थों को तोड़ता है)
किडनी (खून फिल्टर करती है)
आंत, फेफड़े और त्वचा
यदि ये अंग स्वस्थ हैं, तो शरीर खुद ही अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकाल देता है। सामान्य स्थिति में अलग से “डिटॉक्स ड्रिंक” की जरूरत नहीं होती।
⚠️ कब हो सकते हैं खतरनाक?
अत्यधिक सेवन: एप्पल साइडर विनेगर या नींबू का ज्यादा उपयोग एसिडिटी, दांतों की एनामेल क्षति और पेट की समस्याएं बढ़ा सकता है।
हर्बल काढ़े/सप्लिमेंट्स: कुछ जड़ी-बूटियां लिवर पर दबाव डाल सकती हैं, खासकर अगर पहले से लिवर रोग हो।
सिर्फ जूस डाइट: लंबे समय तक केवल लिक्विड क्लेंज़ करने से प्रोटीन और जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, जिससे कमजोरी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का खतरा बढ़ता है।
किडनी मरीज: पोटैशियम या कुछ जड़ी-बूटियों का ज्यादा सेवन किडनी के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
🧠 दावा बनाम वैज्ञानिक प्रमाण
अब तक अधिकांश “डिटॉक्स” दावों के समर्थन में ठोस वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। वजन घटने का असर अक्सर कैलोरी कटौती और पानी के वजन के कारण होता है, जो स्थायी नहीं होता।
✅ सुरक्षित विकल्प क्या है?
डॉक्टरों की सलाह में शरीर को स्वस्थ रखने का मूल मंत्र सरल है:
संतुलित आहार (फल-सब्जियां, प्रोटीन, फाइबर)
पर्याप्त पानी
नियमित व्यायाम
पर्याप्त नींद
शराब और प्रोसेस्ड फूड सीमित मात्रा में
यदि लिवर या किडनी से जुड़ी कोई समस्या है, तो “डिटॉक्स” शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
📌 निष्कर्ष
डिटॉक्स ड्रिंक्स जादुई समाधान नहीं हैं। सीमित मात्रा में सामान्य नींबू पानी या हर्बल ड्रिंक लेना ठीक हो सकता है, लेकिन उन्हें इलाज या अंग-शुद्धि का विकल्प मानना गलत है। स्वास्थ्य का असली डिटॉक्स संतुलित जीवनशैली है, न कि ट्रेंडिंग बोतल।