लौहनगरी जमशेदपुर के चर्चित उद्यमी कैरव गांधी के अपहरण मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस हाई-प्रोफाइल केस में अब तक सात अपराधियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि इस पूरे अपहरण कांड के पीछे बिहार का कुख्यात ‘सिंह साहब’ गिरोह सक्रिय था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अपहरण के बाद अपराधी फिरौती की कोशिशों में नाकाम रहे। लगातार दबाव और तकनीकी निगरानी के कारण गिरोह के सदस्य घबरा गए और अंततः अपहृत उद्यमी को 26 जनवरी की देर रात हजारीबाग के बरही क्षेत्र में सड़क किनारे छोड़कर फरार हो गए, जहां से उन्हें सकुशल बरामद किया गया।

जांच में सामने आया है कि 13 जनवरी को अपहरण के बाद कैरव गांधी को गयाजी जिले के मोहनपुर थाना क्षेत्र स्थित सोंधी गांव में करीब 13 दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया था। इसी सिलसिले में शुक्रवार सुबह जमशेदपुर के सोनारी साईं मंदिर के समीप पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई। जवाबी कार्रवाई में तीन अपराधियों को पैर में गोली लगी, जिन्हें इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

गिरफ्तार आरोपियों में गयाजी जिले के उपेंद्र सिंह और अर्जुन सिंह, जबकि नालंदा के इस्लामपुर निवासी गुड्डू शामिल हैं। इनके बयान के आधार पर गिरोह के चार अन्य सदस्यों को भी पकड़ा गया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से हथियार, जिंदा कारतूस और वारदात में इस्तेमाल किए गए वाहन को बरामद किया है।

सभी गिरफ्तार अपराधियों को जमशेदपुर लाकर मानगो थाना में रखा गया है, जहां सिटी एसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारी उनसे लगातार पूछताछ कर रहे हैं। जांच से यह भी स्पष्ट हुआ है कि अपहरण की योजना पहले से तैयार की गई थी और इसमें स्थानीय नेटवर्क की मदद ली गई थी।

पूरे मामले की निगरानी डीजीपी और जोनल आईजी स्तर से की जा रही है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में इस कांड से जुड़े और भी अहम खुलासे हो सकते हैं। साथ ही व्यापारियों से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।

जांच और गिरफ्तारी अभियान से यह साफ है कि जमशेदपुर पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है और अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ने में बड़ी कामयाबी हासिल की है।