आजकल रिलेशनशिप की दुनिया में रेड फ्लैग और ग्रीन फ्लैग शब्द खूब चर्चा में हैं। हर कोई चाहता है कि उसका पार्टनर समझदार, वफादार, इमोशनल सपोर्ट देने वाला और परिपक्व हो—यानी एक परफेक्ट ‘ग्रीन फ्लैग’।

लेकिन कई बार ऐसा देखने को मिलता है कि कुछ समय बाद वही अच्छे और सुलझे हुए पार्टनर ‘बोरिंग’ लगने लगते हैं। सवाल उठता है—क्या सच में ग्रीन फ्लैग्स से मन ऊब जाता है? या इसके पीछे कोई गहरी मनोवैज्ञानिक वजह होती है?

🧠 1. दिमाग को ड्रामा की आदत

रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति ने पहले टॉक्सिक या हाई-ड्रामा रिलेशनशिप का अनुभव किया है, तो उसका दिमाग उसी तरह की ‘इमोशनल रोलर-कोस्टर’ का आदी हो सकता है।

जब कोई स्थिर और शांत रिश्ता मिलता है, तो वह उतना रोमांचक नहीं लगता। व्यक्ति अनजाने में उसी उतार-चढ़ाव को मिस करने लगता है।

❤️ 2. शांति को बोरियत समझ लेना

एक हेल्दी रिश्ता आमतौर पर कम लड़ाई, ज्यादा समझदारी और संतुलन पर चलता है। लेकिन जिन लोगों ने प्यार को हमेशा तीव्र भावनाओं और लड़ाई-मनमुटाव से जोड़ा है, वे शांति को बोरियत मान बैठते हैं।
असल में, शांति ही सुरक्षित प्रेम का संकेत होती है—लेकिन दिमाग उसे ‘कम एक्साइटमेंट’ के रूप में पढ़ लेता है।
🔄 3. ‘चेज़’ खत्म होने का असर
रिलेशनशिप की शुरुआत में ‘चेज़’ यानी पाने की कोशिश का रोमांच अलग ही होता है। लेकिन जब रिश्ता स्थिर हो जाता है, तो वह नयापन कम हो सकता है।
ऐसे में अगर दोनों पार्टनर नए अनुभव, गतिविधियां या स्पॉन्टेनिटी न जोड़ें, तो रिश्ता रुटीन में बदल सकता है।
💭 4. सेल्फ-सैबोटाज की आदत
मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि कुछ लोग अनजाने में अच्छी चीज़ों से भी डर जाते हैं। उन्हें लगता है कि कहीं यह खुशी छिन न जाए, इसलिए वे खुद ही दूरी बनाने लगते हैं।
यह ‘सेल्फ-सैबोटाज’ का रूप हो सकता है—जहां व्यक्ति सुरक्षित रिश्ते को भी असुरक्षित बना देता है।
💡 5. सोशल मीडिया का प्रभाव
सोशल मीडिया पर दिखने वाले हाई-रोमांटिक या ड्रामेटिक रिलेशनशिप कंटेंट भी वास्तविक रिश्तों को फीका बना सकता है। लोग तुलना करने लगते हैं और उन्हें लगता है कि उनका स्थिर रिश्ता ‘कम फिल्मी’ है।
👩⚕️ एक्सपर्ट्स की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोई पार्टनर सम्मान देता है, भरोसा कायम रखता है और आपके विकास में साथ देता है, तो यह बोरियत नहीं बल्कि परिपक्वता का संकेत है।
रिश्ते में नयापन लाने के लिए साथ में नई गतिविधियां करें, खुलकर संवाद करें और अपनी भावनाओं को समझने की कोशिश करें।
निष्कर्ष:
ग्रीन फ्लैग्स से मन का ऊबना अक्सर रिश्ते की कमी नहीं, बल्कि हमारी भावनात्मक आदतों और अपेक्षाओं का परिणाम होता है।
हेल्दी रिश्ते स्थिर जरूर होते हैं, लेकिन सही समझ और प्रयास से उनमें भी गहराई और रोमांच पाया जा सकता है।