केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं के तहत वितरित किए जाने वाले चावल में पोषक तत्व (फोर्टिफिकेशन) मिलाने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। यह फैसला तब तक लागू रहेगा जब तक कि एक अधिक मजबूत और प्रभावी पोषक तत्व वितरण तंत्र विकसित और लागू नहीं कर दिया जाता।

सरकार ने बताया कि चावल फोर्टिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया की विस्तृत समीक्षा की गई थी। इसी समीक्षा के आधार पर यह निर्णय लिया गया कि लाभार्थियों तक पोषक तत्वों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बेहतर और दीर्घकालिक व्यवस्था तैयार होने तक इस प्रक्रिया को फिलहाल रोका जाए।

🔬 IIT खड़गपुर को सौंपा गया था अध्ययन

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, देश के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में वास्तविक भंडारण परिस्थितियों के तहत फोर्टिफाइड राइस कर्नेल (FRK) और फोर्टिफाइड राइस (FR) की शेल्फ लाइफ का आकलन करने का काम IIT खड़गपुर को सौंपा गया था।
रिपोर्ट में सामने आया कि:
नमी की मात्रा
भंडारण की स्थिति
तापमान
सापेक्ष आर्द्रता
पैकेजिंग सामग्री
जैसे कारक फोर्टिफाइड चावल की स्थिरता और शेल्फ लाइफ को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।
विशेष रूप से यह पाया गया कि लंबे समय तक भंडारण के दौरान सूक्ष्म पोषक तत्वों की मात्रा में कमी आ सकती है, जिससे अपेक्षित पोषण संबंधी लाभ कम हो जाते हैं।
📦 भंडारण और उपलब्धता के आंकड़े
सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
PMGKAY और अन्य योजनाओं के तहत वार्षिक आवंटन: 372 लाख मीट्रिक टन
केंद्रीय भंडार में अनुमानित उपलब्धता: 674 लाख मीट्रिक टन
(जिसमें KMS 2025-26 की रसीदें भी शामिल हैं)
चावल अक्सर 2–3 वर्षों तक भंडारण में रहता है। ऐसे में लंबी अवधि के भंडारण से पोषक तत्वों की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है।
🛑 क्या बदलेगा लाभार्थियों के लिए?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस निर्णय से:
✔ खाद्यान्न की पात्रता में कोई कमी नहीं होगी
✔ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर कोई असर नहीं पड़ेगा
✔ ICDS और मिड-डे मील योजना का संचालन सामान्य रहेगा
यानी लाभार्थियों को निर्धारित मात्रा में मुफ्त चावल मिलता रहेगा, सिर्फ उसमें पोषक तत्व मिलाने की प्रक्रिया अस्थायी रूप से रोकी गई है।
🗂️ राज्यों को मिली अंतरिम छूट
KMS 2025-26 (खरीफ) और KMS 2024-25 की लंबित प्राप्तियों को ध्यान में रखते हुए राज्यों को परिचालन और लॉजिस्टिक जरूरतों के आधार पर फोर्टिफाइड या गैर-फोर्टिफाइड चावल की आपूर्ति करने की अंतरिम छूट दी गई है।
सरकार का कहना है कि भविष्य में एक सुदृढ़ और प्रभावी पोषण वितरण तंत्र विकसित कर इसे दोबारा लागू किया जा सकता है।