घरेलू शेयर बाजार में लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट से निवेशकों की करीब ₹11 लाख करोड़ की पूंजी साफ हो गई। BSE Sensex में 1,000 अंकों से ज्यादा की गिरावट और Nifty 50 में 300 अंकों की कमजोरी ने बाजार की धारणा को कमजोर किया है।

तनाव की बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक संकट है। युद्ध जैसे हालात के कारण कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं। इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिख रहा है।

📊 क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स?
🔹 आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर की एसोसिएट डायरेक्टर तन्वी कंचन का कहना है कि शॉर्ट टर्म में वोलैटिलिटी बनी रह सकती है।
🔹 सोमवार को India VIX 25% से ज्यादा उछलकर 17.13 पर पहुंच गया, जो बाजार में डर और अस्थिरता का संकेत है।
🔹 हालांकि, ऐतिहासिक ट्रेंड बताते हैं कि बड़ी गिरावट के बाद भारतीय बाजार ने लॉन्ग टर्म में रिकवरी की है।
पीएल कैपिटल और श्रीराम वेल्थ के विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिति अभी भी मजबूत है।
जनवरी में नेट जीएसटी कलेक्शन 1.71 लाख करोड़ रुपये रहा।
सरकारी बैंकों और मेटल कंपनियों के नतीजों में सुधार की उम्मीद है।
FY27 में अर्निंग रिकवरी का अनुमान जताया जा रहा है।
🌍 विदेशी–घरेलू निवेश का ट्रेंड
विदेशी निवेशकों (FII) ने हालिया सत्र में ₹7,536 करोड़ की बिकवाली की।
वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹12,293 करोड़ की खरीदारी की।
इससे संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशक अभी भी बाजार पर भरोसा बनाए हुए हैं।
🔮 आगे क्या?
✔️ शॉर्ट टर्म: उतार-चढ़ाव और दबाव संभव
✔️ मिड टर्म: तेल कीमतों और वैश्विक घटनाक्रम पर निर्भरता
✔️ लॉन्ग टर्म: घरेलू मांग और आर्थिक मजबूती सपोर्ट दे सकती है
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर गिरावट और बढ़ती है तो वैल्यूएशन आकर्षक हो सकती है और लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन सकता है।