नए लेबर कोड के विरोध में विभिन्न ट्रेड यूनियनों द्वारा आहूत देशव्यापी हड़ताल का असर कई राज्यों में व्यापक रूप से देखने को मिला। कोयला खदानों में कामकाज ठप रहने से उत्पादन और ढुलाई दोनों प्रभावित हुए, जिसका सीधा असर बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यदि स्थिति लंबी खिंची तो बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी दबाव में आ सकती है।

बैंकिंग और बीमा क्षेत्र में भी कर्मचारियों की भागीदारी के कारण कई शाखाओं में सामान्य कामकाज बाधित रहा। लेनदेन, चेक क्लीयरेंस और अन्य वित्तीय सेवाओं में देरी की खबरें सामने आईं। संताल परगना क्षेत्र में लगभग 200 करोड़ रुपये तक के बैंकिंग लेनदेन प्रभावित होने की बात कही जा रही है, जिससे व्यापारियों और आम ग्राहकों को असुविधा का सामना करना पड़ा।

हड़ताल के दौरान कई जिलों में श्रमिक संगठनों ने जुलूस और प्रदर्शन किए। प्रमुख सड़कों पर धरना-प्रदर्शन के चलते जाम की स्थिति बनी रही, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण आंदोलन की अपील की।

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि नए श्रम कानूनों से कर्मचारियों के अधिकार कमजोर होंगे, इसलिए वे अपने हितों की रक्षा के लिए आंदोलन कर रहे हैं। वहीं, सरकार की ओर से श्रम सुधारों को रोजगार और निवेश के लिए जरूरी बताया गया है। फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच बातचीत की उम्मीद जताई जा रही है। हड़ताल का असर आम जनजीवन, उद्योग और सेवा क्षेत्र पर साफ तौर पर दिखाई दे रहा है।

